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फाउण्डेशन का परिचय

फाउण्डेशन का परिचय

प्राकृत भाषा विकास फाउण्डेशन(रजि.) द्वारा संचालित

प्राकृत अध्ययन पाठ्यक्रम (3+2)

(भारत की शास्त्रीय प्राकृत भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन के​ लिए)

हम केवल प्राकृत नहीं पढ़ रहे, हम जिनेन्द्र वाणी के माध्यम से भारत की आध्यात्मिक विरासत को गढ़ रहे हैं।

प्रेरणास्रोत –अंकलीकर परम्परा के चतुर्थ पट्टाधीश प्राकृताचार्यश्री 108 सुनीलसागरजी महाराज

प्रथम प्रारंभ – 08 मई 2026 से 31 जनवरी 2027 तक

प्रमुख उद्देश्य – (प्रेरणा, गौरव और आनंद से भरपूर)

यह सिर्फ उद्देश्य नहीं… एक आंदोलन है—अपनी भाषा, अपनी संस्कृति और अपनी पहचान को फिर से जगाने का—

  1. प्राकृत संरक्षण – विरासत को फिर से जीवित करना

हम प्राकृत को बचा नहीं रहे, उसे फिर से जन-जन की भाषा बना रहे हैं

  1. सरल और असरदार शिक्षा – हर किसी के लिए

ऐसा अध्ययन जो कठिन नहीं, आनंद देता है—जहाँ सीखना बोझ नहीं, खुशी बन जाए।

  1. जैन आगमों से सीधा जुड़ाव

प्राकृत के माध्यम से धर्म की मूल वाणी को समझना, महसूस करना और जीना।

  1. विद्वान और शिक्षक निर्माण – ज्ञान की नई पीढ़ी

ऐसे प्राकृत प्रेमी तैयार करना जो सिर्फ सीखें नहीं, सिखाएँ भी… और समाज को दिशा दें

  1. अनुवाद और लेखन – विचारों को पंख देना

अपनी भाषा की शक्ति से नए विचार रचना और उन्हें दुनिया तक पहुँचाना

  1. संस्कृति और संस्कार – अपनी जड़ों से जुड़ना

प्राकृत के साथ भारतीयता को जीना, सिर्फ जानना नहीं।

  1. डिजिटल से वैश्विक यात्रा

मोबाइल से शुरू होकर दुनिया तक पहुँचने वाली प्राकृत—यही हमारा लक्ष्य है।

  1. शोध, नवाचार और रोजगार – सीखो और आगे बढ़ो

ज्ञान के साथ अवसर भी—ताकि सीखना भविष्य बनाए।

???? हम सिर्फ प्राकृत नहीं पढ़ रहे…
हम अपनी पहचान, अपनी संस्कृति और अपने भविष्य को गढ़ रहे हैं।

3+2 की सुनियोजित यात्रा – सरल शुरुआत, विशेषज्ञता की पहचान

प्राकृत की पहली उड़ान –आनंद से प्राकृत की ओर

यह वर्ष केवल सीखने की शुरुआत नहीं, बल्कि प्राकृत से अपनापन जोड़ने का पहला सुंदर अनुभव है—जहाँ हर पाठ सरल है, हर अभ्यास रोचक है और हर दिन नई खुशी देता है।

???? अध्ययन और अभ्यास – आसान, स्पष्ट और आत्मीय

सरल प्राकृत व्याकरण – बिना बोझ, सहज तरीके से भाषा की नींव मजबूत।

धर्म-दर्शन का मधुर परिचय – प्राकृत के माध्यम से जीवन को समझने की शुरुआत।

प्राकृत भाषा का सामान्य परिचय – भाषा से पहली मुलाकात, जो धीरे-धीरे अपनापन बन जाए।

 रोचक और आनंददायी पाठ्यक्रम – सीखना बने अनुभव

प्राकृत संभाषण अभ्यास – बोलते-बोलते सीखना, सीखते-सीखते बोलना।

ब्राह्मी लिपि लेखन-पठन अभ्यास – प्राचीन लिपि से जुड़कर इतिहास को महसूस करना।

 विशेष अनुभूति- यह वर्ष आपको बताएगा कि सीखना कठिन नहीं होता—जब तरीका सरल हो और मन में आनंद हो। यहाँ हर छोटा कदम आपको आत्मविश्वास देगा और आगे बढ़ने की प्रेरणा जगाएगा।

आइए, प्राकृत की इस मधुर शुरुआत को अपनाएँ—जहाँ सीखना भी है, आनंद भी है और एक नई पहचान की ओर पहला कदम भी………………..

पाठ्यक्रम के रोचक और आनंददायी उपक्रम –

यह पाठ्यक्रम केवल पढ़ाई नहीं, बल्कि आत्म-जागरण, आनंद और उत्कर्ष की प्रेरक यात्रा है। यहाँ हर पाठ्यक्रम प्रेमी को शुरुआत से ही सम्मान और उत्साह का अनुभव हो—इसी भाव से सुव्यवस्थित अध्ययन किट (पाठ्यसामग्री, नोटबुक, थैली, पेन आदि सहित) प्रदान/प्रेषित की जाएगी।

???? सरलता ही सफलता का सेतु

प्राकृत भाषा की सहजता इस पाठ्यक्रम की आत्मा है। इसे इस प्रकार रचा गया है कि सीखना बोझ नहीं, बल्कि एक सुखद अनुभूति बन जाए—जहाँ हर शब्द अपनेपन का एहसास कराए और हर पाठ आत्मविश्वास जगाए।

???? परीक्षा नहीं, आत्मविश्वास का उत्सव

यहाँ परीक्षा भय नहीं, बल्कि आपके ज्ञान और विश्वास का उत्सव है। ऑनलाइन माध्यम से चार विकल्पों (MCQ) पर आधारित प्रणाली इतनी सरल और सहज है कि आप मुस्कुराते हुए अपनी सफलता की ओर बढ़ते हैं।

 ज्ञान से व्यक्तित्व का विस्तार

यह पाठ्यक्रम केवल जानकारी नहीं देता—यह आपके भीतर उत्साह, अभिव्यक्ति की मधुरता (मुखसुख), आत्मबल और विशिष्ट पहचान का संचार करता है। हर अध्याय आपको नया सोचने, नया करने और स्वयं को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है।

????हर दिन एक नई ऊर्जा, एक नई प्रेरणा

यहाँ सीखना एक उत्सव है—जहाँ हर दिन नई उमंग, नई चेतना और नई उपलब्धि का अहसास होता है। यह पाठ्यक्रम आपको केवल योग्य नहीं बनाता, बल्कि विशेष  बनाता है।

आइए, प्राकृत के साथ इस अद्भुत यात्रा में कदम रखें—जहाँ सरलता में शक्ति है, ज्ञान में आनंद है और हर प्रयास में सफलता का उज्ज्वल विश्वास है।

नोट – शेष वर्षों का पाठ्यक्रम शीघ्र ही घो​षित किया जावेगा।

प्रवेश प्रक्रिया – सरल कदम, सुनहरा अवसर

अब प्राकृत से जुड़ना पहले से भी आसान है—बस एक निर्णय और आप ज्ञान, संस्कृति और नई पहचान की इस सुंदर यात्रा का हिस्सा बन सकते हैं।

???? आवेदन – आपकी सुविधा, आपका तरीका
प्राकृत भाषा की वेबसाइट www.prakritbhasha.com के माध्यम से आप ऑनलाइन या ऑफलाइन—दोनों तरीकों से सहजता से प्रवेश ले सकते हैं।

???? आयु – बस एक शुरुआत चाहिए
यदि आपकी आयु 14 वर्ष या उससे अधिक है, तो यह अवसर आपके लिए है—सीखने की कोई सीमा नहीं होती

???? शुल्क – कम निवेश, बड़ा लाभ
केवल ₹100 वार्षिक
यानी कम खर्च में ज्ञान, अनुभव और प्रमाण—all in one!

???? परीक्षा प्रक्रिया – सरल, पारदर्शी और आत्मविश्वास बढ़ाने वाली

???? ऑनलाइन परीक्षा – घर बैठे सहज अनुभव
परीक्षा पूरी तरह ऑनलाइन होगी—आसान, स्पष्ट और सभी के लिए अनुकूल

???? पहले अभ्यास, फिर आत्मविश्वास
परीक्षा से पहले सेम्पल पेपर दिए जाएंगे, ताकि आप पूरी तैयारी और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें।

???? अपना पेपर, आपके पास
परीक्षा के बाद आपके हल किए गए प्रश्नपत्र की कॉपी आपकी ईमेल पर भेजी जाएगी—ताकि आप खुद को समझें और आगे बेहतर करें

???? पारदर्शिता का भरोसा
हर प्रक्रिया स्पष्ट और विश्वसनीय—आपका विश्वास ही हमारी ताकत है

???? दो अवसर – सफलता के लिए पूरा मौका
सत्र के अंत में दो बार परीक्षा—ताकि हर पाठ्यक्रम प्रेमी को पूरा अवसर मिले।

???? प्रमाण-पत्र – आपकी मेहनत की पहचान
सफल प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा—आपकी उपलब्धि का गौरवपूर्ण सम्मान

यह सिर्फ प्रवेश नहीं… एक नई दिशा की शुरुआत है।
जहाँ प्रक्रिया सरल है, अवसर बड़े हैं और हर कदम आपको आगे बढ़ाता है।

आज ही जुड़ें—और प्राकृत के साथ अपनी पहचान को नई ऊँचाई दें।

प्रमुख उपाधियाँ – उपलब्धि नहीं, आपकी पहचान

यहाँ केवल प्रमाण-पत्र नहीं मिलते…

यहाँ आपकी मेहनत को नाम मिलता है, आपकी साधना को सम्मान मिलता है, और आपकी पहचान बनती है।

???? मुख्य एवं प्रतिष्ठित उपाधि

प्राकृत विद्या विशारद

पाँच चरणों की इस सुंदर यात्रा को पूर्ण करने पर यह गौरवपूर्ण उपाधि आपको ज्ञान, समर्पण और श्रेष्ठता का प्रतीक बनाती है।

 विशेष दक्षता उपाधियाँ – आपकी प्रतिभा को नई उड़ान

???? प्राकृत भाषा आचार्य

जो सीखकर सिखाने की क्षमता रखते हैं—ज्ञान के दीपक बनते हैं

???? प्राकृत साहित्य भूषण

जो शब्दों में सौंदर्य और अर्थ में गहराई खोजते हैं—साहित्य के सच्चे साधक

????प्राकृत आगम विशेषज्ञ

जो जैन आगमों की गहराई में उतरते हैं—धर्म की वाणी से सीधा जुड़ाव

????प्राकृत अनुवादक

जो भाषाओं के बीच सेतु बनते हैं—विचारों को दुनिया तक पहुँचाते हैं

????‍????प्राकृत शिक्षण प्रमाणपत्र

जो आगे बढ़कर दूसरों को आगे बढ़ाते हैं—ज्ञान बाँटने का गौरव

???? वर्षानुसार प्रगतिशील उपाधियाँ – हर कदम एक उपलब्धि

प्रथम वर्ष – प्राकृत प्रवेशिका (नई शुरुआत, नया उत्साह)

द्वितीय वर्ष – प्राकृत प्रवीण (आत्मविश्वास की चमक)

तृतीय वर्ष – प्राकृत कौशल (योग्यता का विकास)

चतुर्थ वर्ष – प्राकृत विशिष्ट (विशेष पहचान)

पंचम वर्ष – प्राकृत विद्या विशारद (पूर्णता और गौरव)

हर वर्ष केवल आगे बढ़ना नहीं… खुद को निखारना है, खुद को पहचानना है।

???? विशेष सम्मान – आपकी चमक, आपका गौरव

????स्वर्ण पदक

सर्वोच्च अंक लाने वालों के लिए—मेहनत की चमकती पहचान

????प्राकृत रत्न

विशेष योगदान और उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए—अलग पहचान, विशेष सम्मान

????प्राकृत शिरोमणि

सर्वश्रेष्ठ संतुलन और श्रेष्ठता के लिए—सभी में सर्वश्रेष्ठ

????आदर्श सम्मान

एक ही स्थान से अधिकतम सहभागिता करने वाली संस्था के लिए—समूह की शक्ति का गौरव

यह केवल उपाधियाँ नहीं…

यह आपकी मेहनत की मिठास है, आपके सपनों की चमक है और आपके भविष्य की पहचान है।

आइए, इस मधुर यात्रा में कदम रखें—जहाँ हर प्रयास सम्मान बनता है, और हर उपलब्धि मुस्कान बन जाती है।

स्मार्ट लर्निंग: सीखना अब आसान और आनंदमय

सीखना अब केवल पढ़ना नहीं, बल्कि देखना, समझना और अनुभव करना है। हमारा डिजिटल प्लेटफॉर्म हर पाठ्यक्रम प्रेमी के लिए सीखने को आसान, रोचक और प्रेरक बनाता है—

???? हर पाठ – केवल 5 मिनट में समझें

संक्षिप्त और प्रभावशाली वीडियो, जिससे आप कम समय में पूरी बात आसानी से समझ सकें।

????आकर्षक PPT की सरल PDF

सुंदर और स्पष्ट प्रस्तुति, जिसे पढ़ते ही विषय मन में बैठ जाए।

????इन्फोग्राफिक्स – एक नजर में पूरा पाठ

ऐसे चित्र और चार्ट जो कठिन बातों को भी बहुत सरल बना दें।

????अभ्यास के लिए प्रश्नोत्तर PDF

हर पाठ के साथ 10–20 प्रश्न, ताकि आप सीखें भी और खुद को परखें भी।

????ऑनलाइन क्लास + रिकॉर्डेड लेक्चर

सीधे जुड़कर सीखें या अपनी सुविधा से कभी भी, कहीं भी दोबारा देखें।

????डिजिटल टेस्ट और मूल्यांकन

सरल और तुरंत परिणाम देने वाली परीक्षा प्रणाली, जिससे आपका आत्मविश्वास हर दिन बढ़े।

????सीखना अब बने आनंद का अनुभव

यह डिजिटल माध्यम आपको तेज, सरल और आत्मविश्वास से भरा बनाता है—जहाँ हर क्लिक के साथ आप आगे बढ़ते हैं।

अब सीखना होगा स्मार्ट, सरल और प्रेरणादायक—आपके अपने अंदाज़ में!

अध्यक्ष

प्रो. ऋषभचन्द जैन फौजदार

डीन, एकलव्य विश्वविद्यालय, दमोह

महामंत्री

डॅा. आशीष जैन आचार्य शाहगढ़

(राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त)

पाठ्यक्रम संयोजक

डॅा. आशीष जैन शास्त्री बम्हौरी

कार्यालय एवं सम्पर्क सूत्र

154, गीतांजलि ग्रीनसिटी, संजय ड्राइव रोड़ सागर -470001

Website - www.prakritbhasha.com

Email – prakritfoundation25@gmail.com

Contact no. – 8305259506, 9329092390,9685846161,7014029330

 

भारत सरकार ने प्राच्य भाषाओं के अन्तर्गत आने वाली, देश की प्राचीन प्राकृत भाषा को अक्टूबर २०२४ को शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्रदान किया है, जिसका मूल उद्देश्य इस भाषा में छुपे हुए वे सारे रहस्य जिससे राष्ट्र की समृद्धि, विकास, संस्कृति परिज्ञान और आर्थिक सम्पन्नता आदि के विषय में जानकारी प्राप्त की जा सके, जो आज अनुपलब्ध है। ऐसे में, भारत में अनेक विश्वविद्यालयों में प्राकृत भाषा जैसी प्राच्य भाषाओं के उन्नयन के लिए स्वतंत्र विभाग हैं, अनेक जैन संस्थाएं स्वशासी होकर भी प्राकृत का प्रचार कर रही हैं, कुछ स्वपोषित विद्यालय, महाविद्यालय भी प्राकृत के प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्य रहे हैं।

ऐसे में, प्राकृत भाषा के लिए समर्पित सभी संस्थाओं, विद्वानों और प्राकृत प्रेमियों को एक मंच पर एक साथ स्थापित करना आवश्यक हो गया है, जिससे हम प्राकृत भाषा के सर्वांगीण विकास के लिए परिचर्चा और क्रियान्वयन की युति संस्थापित कर सकें। इसी उद्देश्य को लेकर प्राकृत भाषा के मर्मज्ञ विद्वान् दिगम्बर जैनाचार्य श्री सुनीलसागरजी महाराज ने अतिशय क्षेत्र अंदेश्वर पाश्र्वनाथ कुशलगढ़ जिला - बांसवाड़ा (राजस्थान) में एकलव्य विश्वविद्यालय, दमोह मध्यप्रदेश के तत्त्वावधान में जैन और प्राकृत अध्ययन एवं संस्कृत विभाग द्वारा ''आचार्य सुनीलसागर महाराज का प्राकृत साहित्य के माध्यम से राष्ट्र को अवदान'' विषय पर आयोजित राष्ट्रीय युवा विद्वत् संगोष्ठी में 07 अक्टूबर 2020 को भारत के प्राकृत विद्वानों के एक संगठन की स्थापना के संबंध में मार्गदर्शन दिया था। तदनुरूप जैन अनुशीलन केन्द्र राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के तत्त्वावधान में दिनांक 16-18 सितम्बर 2022 को आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय जैन विद्या विद्वत् संगोष्ठी में सम्मिलित प्राकृत प्रेमियों एवं विद्वानों के सुझाव पर प्राकृत संगठन के लिए मसौदा तैयार करने विचार हेतु किया गया, जिसमें प्राकृत भाषा के विकास के लिए डॉ. ऋषभचन्द जैन फौजदार, एकलव्य विश्वविद्यालय, दमोह की अध्यक्षता में ९ सदस्यीय समिति तैयार की गई और आचार्यश्री सुनीलसागरजी महाराज के समक्ष उपस्थित होकर उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया गया, जिसमें प्राकृत भाषा विकास फाउण्डेशन के नाम से एक संगठन के गठन की आयोजना की गई।

समिति ने प्राकृत भाषा के विकास के लिए लगभग २ वर्षों के अथक परिश्रम से प्राकृत भाषा विकास फाउण्डेशन का मसौदा तैयार किया गया। उक्त कार्ययोजना को किशनगढ़ जिला- अजमेर, राजस्थान में 27-29 अक्टूबर 2024 में आयोजित राष्ट्रीय विद्वत् संगोष्ठी में आचार्यश्री सुनीलसागरजी महाराज के ससंघ सान्निध्य में रखा गया। आचार्यश्री सुनीलसागरजी महाराज ने उक्त कार्ययोजना पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा - आचार्यश्री वसुनंदीजी महाराज, आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज के शिष्य मुनिश्री प्रणम्यसागरजी महाराज, आचार्यश्री विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनिश्री आदित्यसागरजी महाराज एवं जो-जो दिगम्बर मुनिराज प्राकृत भाषा के लिए विशिष्ट कार्य रहे हैं, आपका यह फाउण्डेशन उनका भी मार्गदर्शन प्राप्त करें। जिससे सभी मिलकर प्राकृत भाषा के उन्नयन में सहभागी बन सके। हमने तदनुरूप कार्य करने के लिए आचार्यश्री से आशीर्वाद प्राप्त किया।

प्राकृत भाषा विकास फाउण्डेशन को पंजीकृत कराने की प्रक्रिया की गई। पंंजीयन में अनेक व्यवधान उपस्थित हुए लेकिन हमारी पूरी टीम ने इस कार्य को अत्यंत मनोयोग से पूर्ण किया। दिनांक ११ फरवरी २०२५ को प्राकृत भाषा विकास फाउण्डेशन का पंजीयन का प्रमाण-पत्र प्राप्त हो गया है, जिसका क्रमांक ०६/०९/०१/१५३०३/२५ है। आचार्यश्री सुनीलसागरजी महाराज के सान्निध्य में एवं श्री दिगम्बर जैन बीसपंथी जैन ट्रस्ट, दाहोद गुजरात के आयोजकत्व में दिनांक २१ फरवरी से २२ फरवरी २०२५ तक  अन्तर्राष्ट्रीय प्राकृत विद्वत्सम्मलेन के आयोजन में उपस्थित समस्त प्राकृत स्नेहीजनों के मध्य प्राकृत भाषा विकास फाउण्डेशन सम्पूर्ण मसौदा प्रस्तुत किया जा रहा है। जिसके पश्चात् सभी प्राकृत प्रेमी इसी कार्य को करने के लिए उद्यत हो सकेंगे। मैं अपनी पूरी टीम को बहुत-बहुत साधुवाद देता हूँ जिन्होंने अथक परिश्रम करके इस मसौदे को तैयार किया और पंजीयन की जटिल प्रक्रियाओं को पूर्ण कर आज शास्त्रीय प्राकृत भाषा का उत्थान करने के लिए संकल्पपूर्वक अग्रसर हुए हैं। डॉ. ऋषभचन्द जैन फौजदार अध्यक्ष निर्माण समिति प्राकृत भाषा विकास फाउण्डेशन|